भारतीय शिक्षा बोर्ड क्या है | Bhartiya Shiksha Board (BSB) 2022

भारतीय शिक्षा बोर्ड क्या है Bhartiya Shiksha Board (BSB) का गठन हो चुका है इसका मतलब ये हुआ कि अब अध्यात्म के आधार पर भी शिक्षा दिया जा सकेगा और ये शिक्षा के स्वदेशी करण की ओर एक बड़ा कदम हो सकता है।

शिक्षा के भारतीय करण का काम स्वामी रामदेव जी ने पतंजलि से करने का शुरुआत किया है। स्वामी रामदेव जी का कहना है कि 1835 में लॉर्ड मैकाले ने जो पाप करके गया था वो धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा।

और भारतीय शिक्षा बोर्ड के जरिए भारतीय लोगों के शिक्षा में वर्तमान शिक्षा के साथ ही अध्यात्म शिक्षा भी पढ़ाई जाएगी।

भारतीय शिक्षा बोर्ड क्या है इसके जरिए भारत के बच्चों के मानस भारत और भारतीयता के अनुरूप तैयार किया जाएगा। साथ ही स्वामी रामदेव जी ने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन करने के लिए धन्यवाद दिए हैं।

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भारतीय शिक्षा बोर्ड क्या है?

जिस तरह से CBSE Bord होता है, ICIC Bord होता है उसी तरह से भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन किया गया है। इस बोर्ड को पहली बार मान्यता 4 अगस्त 2022 को भारत सरकार के तरफ से दी गई है और इसका अप्रूवल मिलते ही स्वामी रामदेव जी भारत सरकार को बहुत-बहुत बधाई दिए हैं।

सन 1835 में मैकाले के द्वारा विदेशी शिक्षा बोर्ड का गठन किया गया था जिसमें सिर्फ अक्षर का ज्ञान बच्चों को दिया जा रहा था लेकिन अब धीरे-धीरे ये शिक्षा पद्धति समाप्त हो जाएगी और भारतीय शिक्षा बोर्ड के जरिए स्वदेशी शिक्षा जिसमें अध्यात्म का भी शिक्षा रहेगा इसे लाया जाएगा।

अभी तक कन्वेंट स्कूल या सरकारी स्कूलों में सिर्फ अक्षर का ज्ञान दिया जाता था जिसमें बच्चों के अंदर भारत की संस्कृति सभ्यता और किसी भी तरह का संस्कार नहीं हो पाते थे।

इससे नुकसान ये हो रहा था कि बच्चे सिर्फ पैसे कमाने का मशीन बन रहे थे और उनके अंदर संस्कार नाम की कोई चीज नहीं होती थी। जिस तरह से एक रोबोट काम करता है वैसे ही आज के बच्चे बनते जा रहे थे और उनके अंदर अपने धर्म एवं देश के प्रति जिम्मेवारी ना के बराबर होती थी।

1835 में लॉर्ड मैकाले ने शिक्षा का नीव इसलिए रखा था ताकि भारत के लोग सिर्फ नौकरी करने वाले बने, उनके अंदर अपने देश एवं धर्म के प्रति जागरूकता ना हो सके जिससे भारतीय लोग उनके सदा गुलाम बने रहें।

आजादी के 75 साल बाद आजादी के महोत्सव मना रहे देशवासियों को एक बहुत बड़ा तोहफा मिला। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा भारतीय शिक्षा बोर्ड क्या है का गठन किया गया और इसका आधार स्वामी रामदेव जी के द्वारा बनाया गया था।

भारतीय शिक्षा बोर्ड से देश के लाखों स्कूलों को जोड़ा जाएगा और इसमें तैयार किए गए सिलेबस का पढ़ाई बच्चे करेंगे।

भारतीय शिक्षा बोर्ड में पढे हुए बच्चे ज्ञानवान बनेंगे संस्कारित बनेंगे और उनके अंदर देश एवं अपने धर्म के प्रति जागरूकता होगी क्योंकि इसके सिलेबस में वर्तमान में जो शिक्षा है उसमें सुधार करके उसे भी रखा जाएगा साथ ही अलग से धर्म एवं संस्कृति के बारे में भी पढ़ाया जाएगा।

नामविवरण
पूरा नामभारतीय शिक्षा बोर्ड क्या है – Bhartiya Shiksha Board
छोटा नामभ स ब – BSB
स्थापनावर्ष 2022
मान्यताभारत सरकार 4 अगस्त 2022
प्रकारशिक्षा बोर्ड
ऑफिशियल वेबसाइटbsb.org.in
Emailsecretary@bsb.org.in
Phone No+91 8954555111
Addressभारतीय शिक्षा बोर्ड
पतंजलि योगपीठ के पीछे, फेज-2,
दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग, बहादराबाद, हरिद्वार- 249405

भारतीय शिक्षा बोर्ड के फायदे क्या हैं?

सन 1835 में लॉर्ड मैकाले ने Indian education system बनाया था और इसमें बच्चे पढ़ते तो हैं लेकिन उनको सिर्फ अक्षर बोध होता है यानी वो बच्चे सिर्फ पैसे कमाने का मशीन बन जाते हैं लेकिन उनके अंदर किसी भी तरह का संस्कार और अध्यात्म नहीं होता है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड में पढ़ने वाले बच्चो के अंदर आत्मबोध होगा भारतबोध होगा और जो व्यक्तित्व एवं नेतृत्व उनके अंदर पैदा होगा उसे वो मैकाले के द्वारा बनाया गया इंडियन एजुकेशन सिस्टम में वंचित रह जाते थे।

स्वामी रामदेव जी एवं श्री नरेंद्र मोदी जी का एक सपना ये था कि शिक्षा का स्वदेशीकरण हो और भारतीय करण हो एवं अध्यात्म पर आधारित पाठ पढ़ाया जाए वो पूरा होते हुए दिख रहा है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड के सबसे बड़ा फायदे यह है कि इसमें सिर्फ अक्षर का ही ज्ञान नहीं दिया जाएगा बल्कि भारत के सभ्यता संस्कृति एवं अध्यात्म से जुड़ी पढ़ाई भी कराई जाएगी एवं इतिहास में बहुत कुछ गलत चीजें बताई जा रही थी जिसे अब सुधारा जाएगा।

भारतीय शिक्षा बोर्ड से पढ़कर निकले हुए बच्चे अपने धर्म एवं देश के प्रति जागरूक रहेंगे और पैसे कमाने के साथ ही अपने घर परिवार एवं देश के लोगों का भी पूरा ख्याल रखेंगे क्योंकि उनके अंदर भारत की संस्कृति भरी जाएगी।

आजकल के बच्चे कन्वेंट स्कूल में पढ़ने के बाद सिर्फ पैसे कमाने वाला मशीन बन जाते हैं और उनके अंदर ना हीं अपने देश और धर्म के प्रति जागरूकता होती है और ना ही घर परिवार से इतना लगाव होता है क्योंकि विदेशों में लगभग ऐसा ही होता है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड क्यों?

स्वामी रामदेव जी के अनुसार सन 1835 में लॉर्ड मैकाले ने भारत को हमेशा के लिए सांस्कृतिक उपनिवेश बनाने का जो षड्यंत्र रचा था उस षड्यंत्र को भारत बोध के साथ उसका समाधान करने के लिए स्वामी रामदेव जी ने पिछले एक दशक से ये संकल्प लिया हुआ था कि भारतीय शिक्षा बोर्ड के तरह एक ऐसा समर्थ बोर्ड होना चाहिए।

जिसमें भारतीय बच्चों को भारतीय संस्कृति के समस्त प्रवाह और निरंतरता के साथ आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी के साथ आधुनिक और नूतन दोनों के समन्वय के साथ शिक्षा दी जाए।

भारतीय शिक्षा बोर्ड में पढ़ने वाले बच्चे केवल पैसे कमाने का मशीन ही नहीं बनेंगे बल्कि उनके मन में अपने देश एवं संस्कृति के प्रति गौरव का बोध रहेगा।

इस संकल्पना को संस्कृत मुलक वर्तमान में श्री नरेंद्र मोदी जी के सरकार ने भारत के 75 वे अमृत महोत्सव के दौरान मैकाले के उस विषाक्त शिक्षा पद्धति के समाधान के रूप में वैधानिक स्वरूप दिया है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड को भारत सरकार ने अपने उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से अमलीजामा पहनाया। इस प्रक्रिया में समस्त दृष्टि से समस्त आयामों के आधार पर मूल्यांकन करने के बाद पतंजलि योगपीठ को वैधानिक रूप से स्पॉन्सरिंग बॉडी चयनित किया गया।

भारतीय शिक्षा बोर्ड में कुल 18 सदस्य हैं जिसमें 7 सदस्य भारत सरकार के हैं और उसमें पांच कुलपति स्तर के लोग भारत सरकार से नामित हैं और निदेशक NCRET और चेयरमैन सीबीएसई (CBSE) भी भारतीय शिक्षा बोर्ड के भारत सरकार द्वारा नामित सदस्य है।

बाकी के जो बोर्ड के सदस्य हैं उसके लिए स्वामी रामदेव जी को अधिकार था कि वो उन सदस्यों को नामित कर सकते हैं। स्वामी जी ने जिन सदस्यों को नामित किया है वह वैदिक संस्कृति भारत के ज्ञान परंपरा में या तो उच्च दर्जे के हैं या आधुनिक शिक्षाविदों के जो भारत में प्रथम सूची है उसमें सम्मिलित हैं।

क्या ये बोर्ड वैधानिक रूप से पूरे भारत में संचालन के लिए सक्षम है?

अब एक सवाल अभिभावकों के मन में या भारत देश के जो सामान्य लोग या दर्शक या श्रोता है उनके मन में आ सकता है कि क्या ये भारतीय शिक्षा बोर्ड वैधानिक रूप से पूरे भारतवर्ष में संचालन करने के लिए सक्षम है।

तो इसका उत्तर यह है कि हा क्योंकि अभी 3 अगस्त 2022 को भारत सरकार ने पूज्य स्वामी रामदेव जी के इच्छा को ध्यान में रखते हुए भारतीय शिक्षा बोर्ड को जो वैधानिक रूप से गठन किया था उसको भारत के समस्त केंद्रीय बोर्ड और राज्य बोर्ड के समकक्ष समस्त दृष्टि से घोषित कर दिया है यही नहीं लिखित रूप से नोटिफाई भी किया है।

इसलिए भारत सरकार की तरफ से भारतीय शिक्षा बोर्ड को पूरी तरह से मान्यता प्रदान कर दी गई है एवं इसका अप्रूवल दे दिया गया है। और हम ये कह सकते हैं कि भारतीय शिक्षा बोर्ड भारत सरकार के तरफ से पूरी तरह से प्रमाणित बोर्ड है।

हम अपने बच्चों को भारतीय शिक्षा बोर्ड में क्यों पढ़ाएं?

स्वामी रामदेव जी ने पहले ही संकेत दिये थे भारत बोध का यानी भारतीय शिक्षा बोर्ड में पढ़ाने से हमारे बच्चों के अंदर भारत का बोध होगा, भारत के संस्कृति अध्यात्म वेद पुराण की जानकारी होगी और वो सिर्फ पैसे कमाने का मशीन नहीं बनेंगे बल्कि इस बोर्ड में पढे हुए बच्चे पूरी तरह से संस्कारित और अपने देश और धर्म के प्रति जागरूक होंगे।

आज के समय में पूरी दुनिया यूरोपीय सभ्यता यूरोपीय संस्कृति एवं विकास के प्रति आकर्षित है एवं मुरीद है एवं उसका नकल करना चाहती है लेकिन 13 वी शताब्दी तक यूरोप भी अंधकार के युग में था।

यूरोपीय लोग 14 वी शताब्दी के बाद जब रोम एवं यूनान के उन प्राचीन दार्शनिकों के जो सुक्रान प्लुटो और अरस्तु थे उनके दार्शनिक परंपरा का पुनः नवीन परिवेश के साथ मूल्यांकन अध्ययन करना शुरू किया तब जाकर एक समर्थ यूरोप का उदय हुआ।

कहने का मतलब ये है कि जब तक कोई भी समाज अपने प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण संवर्धन के प्रति सतर्क नहीं हो जाता वह समाज और राष्ट्र एक शक्तिशाली के रूप में कभी भी उभर नहीं सकता इसलिए भारतीय शिक्षा बोर्ड जरूरी है।

भारत के बौद्धिक संपदा में इतना ज्यादा सामर्थ है कि हम ऊंचाइयों को छू सकते थे लेकिन मैकाले के द्वारा लाया गया गलत शिक्षा व्यवस्था के कारण ही हम उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाए हैं।

मैकाले शिक्षा पद्धति का दोषपूर्ण निती

सन 1835 में लॉर्ड मैकाले ने भारत में एक शिक्षा पद्धति लाया जिसे Indian education system के नाम से जाना गया लेकिन इस शिक्षा पद्धति में इतना ज्यादा दोष था कि इससे भारतीय संस्कृति को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ।

इस शिक्षा पद्धति को भारत को एक सदैव एक सांस्कृतिक उपनिवेश के रूप में स्थापित करने के लिए लाया गया था। उनके मन में ये था कि अगर वो भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता दे भी दे तो हमेशा चिरकाल तक भारत उनके लिए एक सांस्कृतिक उपनिवेश वैचारिक उपनिवेश और परिणामत: आर्थिक उपनिवेश के रूप में सदैव बना रहे।

मैकाले शिक्षा पद्धति का अगला मकसद ये था कि भारत के लोग कभी भी स्वदेशी के अवधारणा पर ना तो आर्थिक क्षेत्र में ना सामाजिक और ना ही सांस्कृतिक क्षेत्र में गर्व से अपना सिर उठा सकें।

उनकी नियति यही थी कि भारत के लोग उनको हमेशा श्रेष्ठ मानते रहे और उसी हिसाब से उन्होंने इस दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति को भारत में लाया था लेकिन अब भारतीय शिक्षा बोर्ड के जरिए उस पाप को धोया जा सकेगा।

आज स्वतंत्रता के 75 साल के बाद भी मैकाले के द्वारा लाया गया दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति हमारा पीछा करती चली आ रही है इसलिए इस साया से बचने के लिए भारतीय शिक्षा बोर्ड को लाया गया है।

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भारतीय शिक्षा बोर्ड का नया फ्रेमवर्क

भारतीय शिक्षा बोर्ड में भारत की जो नई शिक्षा नीति है जो नेशनल फ्रेमवर्क है अभी तक 2005 का चल रहा है लेकिन अब 2020 के नया शिक्षा पद्धति के आधार पर नया फ्रेमवर्क आना शुरू हो गया है।

उसके अनुरूप ही उसमें जो कुछ भी अनुषोध मूल्य बोध हैं जो भी इवैल्यूएशन है जो भी लर्निंग ऑब्जेक्टिव है जो टैक्स मुक्त का प्रारूप है जो कैरकुलम और सिलेबस का मोड़ है उस को ध्यान में रखते हुए ही लेकिन इससे भी एक कदम आगे ये भाव रखा गया है कि हम विज्ञान और टेक्नोलॉजी में विश्वरूप से नेतृत्व प्रदान करने के लिए समर्थ हो।

भारतीय शिक्षा बोर्ड में पढ़ने वाले बच्चे भारत के जड़ों के साथ में खड़े रहेंगे और भारत के संस्कृति मूल्यों के साथ जोड़कर आगे बढ़ेंगे।

भारतीय शिक्षा बोर्ड में बच्चों के पढ़ने का फायदा ये है कि वो सिर्फ ऊंचाइयों को छू कर आसमान में फर्क फराते ना रहे बल्कि हमें अपना जमीन भी मालूम होना चाहिए।

जिस राष्ट्र के बच्चे अपने सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े नहीं होते हैं वो आंधियों और तूफानों में ढह जाते हैं इसलिए देश के बच्चों को अपने देश के सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए ही भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन किया गया है।

पुस्तकें कब तक आएंगी

भारत ही नहीं बल्कि भारत के बाहर के भी स्कूल एजुकेशन के जो अच्छी संस्थाएं हैं उन संस्थाओं के उच्च कोटि के शिक्षक शिक्षिकाओं को भारतीय शिक्षा बोर्ड के पुस्तकों को तैयार करने में लगाया गया है।

हर विषय में समूह बनाकर उसके अनुरूप पुस्तकों को तैयार करने का प्रक्रिया चालू किया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि मार्च 2023 तक भारतीय शिक्षा बोर्ड के पुस्तकें आने आरंभ हो जाएंगे।

मार्च 2023 तक नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के पुस्तकों को तैयार कर लिया जाएगा ऐसा माना जा रहा है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड के पुस्तकों में भारत के वेद और वेदानुकूल शास्त्रों आदिवासी भाषाओं के शास्त्रों और दक्षिण भारत के तमिल और कन्नड़ तेल्गु मलयालम के शास्त्रों का अध्ययन किया जा रहा है इसलिए पुस्तके आने में इतना समय लग रहा है।

संस्कृत अनिवार्य है

भारतीय शिक्षा बोर्ड के पुस्तकों में पहली क्लास से लेकर 12वीं तक संस्कृत भाषा को अनिवार्य किया गया है। ये इसलिए किया गया है क्योंकि भारत के बच्चे चाहे कितने भी सामर्थ हो जाएं लेकिन वो भारत के शास्त्रों को पढ़ें भले ही वो इंजीनियर हो जाएं डॉक्टर हो जाएं या कोई और पद पर रहे।

लेकिन इसमें कहा ये गया है कि सब्जेक्ट लिटरेचर नहीं होगा लेकिन संस्कृत का लिंग्विस्टिक नॉलेज जरूरी होगा इससे होगा ये कि बच्चों को संस्कृत का सामान्य व्याकरण और संस्कृत के कुछ प्रमुख पुस्तकों साहित्य का सामान्य बोध हो सके।

इंग्लिश भाषा में भी भारतीय संस्कृति होगी

अभी तक मैकाले शिक्षा पद्धति में इंग्लिश भाषा में यूरोप के पृष्ठभूमि से परियों की कहानियां हुआ करती है लेकिन अब भारतीय शिक्षा बोर्ड में जो इंग्लिश की पुस्तकें होगी उसने दिए गए कहानियों में भरतमुनि के नाटक लिखे जाएंगे उपनिषदों के कथा लिखे जाएंगे।

यही नहीं इन इंग्लिश के पुस्तकों में महाभारत और रामायण के मूल्य बोध प्रेषित करने वाले संप्रेषित समुच्चय होंगे। इतना ही नहीं बुध एवं जैन धर्म के जातक कथाओं में भारत के जो सांस्कृतिक आत्मा छुपी हुई है उसका बौद्ध होगा भारतीय शिक्षा बोर्ड के इंग्लिश के पुस्तकों में।

भारत में आदिवासी समाज द्वारा जो उच्च कोटि के काम किए गए हैं उसे भी इंग्लिश के पुस्तकों में स्थान दिया जाएगा।

इतिहास में भी बदलाव होगा

भारतीय शिक्षा बोर्ड में इतिहास के पुस्तकों में बदलाव किया जाएगा क्योंकि पहले के इतिहास के पुस्तकों में इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया गया है और जो जानकारियां महत्वपूर्ण थी उसे इतिहास में जगह देना चाहिए था उसे नहीं दिया गया और जिसे नहीं देना चाहिए उसे बढ़ा चढ़ा कर लिखा गया है ऐसा कहा जाता है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड में इतिहास के पुस्तकों को पढ़कर भारत के बच्चे भारत के समूची ऐतिहासिक यात्रा को पढ़ते हुए अखंड भारत का ज्ञान ले पाएंगे।

वर्तमान में इतिहास के पुस्तकों में भारत के हजारों साल के प्राचीन ज्ञान की परंपरा को बहुत ही कम जगह दिया गया है और 11वीं शताब्दी से लेकर 17वीं शताब्दी तक के इतिहास को बहुत ही ज्यादा बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड के इतिहास के पुस्तकों को पढ़ने के बाद बच्चों को ये बोध होगा कि वो एक पराजित राष्ट्र के नागरिक नहीं है बल्कि एक निरंतर संघर्षशील सनातन संस्कृति के प्रतीक और उसके बोध के साथ-साथ समर्थ के साथ युक्त अखंड व्यक्तित्व हो।

विलडोरान्ड का कहना था कि भारत विश्व की समस्त संस्कृतियों की जननी है। संस्कृत समस्त भाषाओं की मां होती है इसलिए इसमें हुए गलतियों को सुधारना भारतीय शिक्षा बोर्ड के लिए एक उच्च मकसद है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब

भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष कौन हैं?

भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष योग गुरु स्वामी रामदेव जी हैं इन्होंने ही सीबीएसई के तर्ज पर मैकाले शिक्षा पद्धति के दोषपूर्ण नीति को समाप्त करने के लिए शिक्षा का स्वदेशीकरण हेतु भारतीय शिक्षा बोर्ड की पहल की थी।

स्वामी रामदेव ने सन 2015 में ही सरकार के समक्ष भारतीय शिक्षा बोर्ड का विचार स्पष्ट किया था और तब से ही इस पर काम चल रहा था। अभी कुछ ही दिन पहले मार्च 2023 को भारतीय शिक्षा बोर्ड को भारत सरकार के तरफ से मान्यता एवं अप्रूवल दे दिया गया है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड वेबसाइट

भारतीय शिक्षा बोर्ड का ऑफिशियल वेबसाइट है https://bsb.org.in/ जब आप इस साइट को ओपन करेंगे तो होम पेज पर ही स्वामी रामदेव जी का एक वीडियो आपको दिख जाएगा और इस बोर्ड के बारे में पूरी जानकारी आप इस साइट से ले सकते हैं।

आप इस साइट पर दिए गए ई-मेल एवं कांटेक्ट नंबर से संपर्क भी कर सकते हैं और इस बोर्ड के बारे में अधिक जानकारी ले सकते हैं।

भारतीय शिक्षा बोर्ड की मान्यता

भारतीय शिक्षा बोर्ड भारत सरकार के द्वारा मान्यता प्राप्त बोर्ड है सरकार से 4 अगस्त 2023 को ही मान्यता एवं अप्रूवल मिला था। सरकार के तरफ से मान्यता मिलते ही स्वामी रामदेव जी भारत सरकार को बधाई एवं साधुवाद दिए थे।

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निष्कर्ष

भारतीय शिक्षा बोर्ड क्या है के सभी पाठ्य पुस्तकों में यही प्रयास किया गया है कि बच्चों के अंदर भारत बोध लाया जा सके और हर विषय में लाया जाए।

कुल मिलाकर भारतीय शिक्षा बोर्ड के माध्यम से आधुनिक शिक्षा पद्धति के समस्त सिद्धांत और विराट भारत की गुरुकुलीय परंपरा और उसका समन्वय भारत के प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय करते हुए वैश्विक नागरिक बनाने के लिए इस बोर्ड को लाया जा रहा है।

हमने इस पोस्ट भारतीय शिक्षा बोर्ड क्या है Bhartiya Shiksha Board (BSB) में भारतीय शिक्षा बोर्ड के बारे में बहुत ही सरल भाषा में सभी जानकारी समझाने की कोशिश की है लेकिन अगर अभी भी आपके पास कुछ पूछने के लिए है तो नीचे कमेंट बॉक्स में आकर लिखकर हमें बताएं।

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