राखी का त्यौहार कैसे मनाया जाता है | जानें राखी बांधने का संपूर्ण विधि

हम यहां पर जानेंगे राखी का त्यौहार कैसे मनाया जाता है भारत में रक्षाबंधन भाई बहनों का एक बड़ा त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है।

भारतीय संस्कृति का एक ऐसा रत्न है rakshabandhan जिसकी महीन किरणों में रिश्ते झिलमिलाते रहते हैं इस त्यौहार में धागों के जरिए प्यार की दौलत भाई की कलाई पर बांधा जाता है।

भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन का त्यौहार rakhi muhurat मे बहने अपने भाई के कलाई पर राखी बांधती है एवं भाई की उन्नति और लंबी उम्र की कामना करती है।

वही भाई भी बहनों की रक्षा सुरक्षा एवं अच्छा स्वास्थ्य का कामना करते हैं यह त्यौहार हर साल सावन के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

वैसे तो rakshabandhan त्यौहार को भाई बहनों का पर्व माना जाता है लेकिन अलग-अलग स्थान पर अपनी अपनी परंपराओं के अनुसार अलग-अलग तरह से मनाया जाता है।

Raksha Bandhan पर्व का संबंध रक्षा सूत्र से है यानी जो हमारा रक्षा सुरक्षा करने वाला है उसको हम रक्षा सूत्र बांधते हैं। महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से रक्षाबंधन त्यौहार अपनी सेना के साथ मनाने का सलाह दिए थे।

भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था कि तुम अपनी सेना के साथ में रक्षाबंधन का त्यौहार मनाओ जिससे तुम्हारी सेना की सुरक्षा होगी। उन्होंने रक्षाबंधन त्यौहार में अद्भुत शक्ति होने की बात भी कही थी। ये भी पढ़ें: रक्षाबंधन पूजा विधि मंत्र जाप कैसे करें

राखी का त्यौहार कैसे मनाया जाता है

रक्षाबंधन के त्यौहार में अपने भाई को राखी बांधने का संपूर्ण विधि नीचे बताया जा रहा है।

1. सावन के पूर्णिमा यानी rakhi muhurat रक्षाबंधन के त्यौहार में भाई बहन सुबह स्नान करने के बाद भगवान की पूजा करते हैं पूजा करने के बाद रोली, कुमकुम, अक्षत एवं दीप जलाकर एक थाली में सजाते हैं।

थाली में एक नारियल भी रखें और साथ ही एक तांबे के लोटे में गंगाजल अगर आपके पास गंगाजल नहीं है तो साफ पानी भी रख सकते हैं और पीला सरसों भी रख लें।

2. फिर थाली में रंग बिरंगी राखिया रखी जाती है एवं उनकी पूजा की जाती है। फिर एक बात का खास करके ध्यान रखा जाता है कि राखी बांधने से पहले आपके भाई का सिड़ रुमाल या गमछा से ढका होना चाहिए।

फिर बहन भाई के माथे पर रोली कुमकुम एवं अक्षत से टीका लगाती है, इसके लिए दाहिना हाथ में चौथी उंगली का इस्तेमाल किया जाता है यानी लास्ट में सबसे छोटी उंगली के पहले जो उंगली होता है उसी से टीका लगाया जाता है।

सबसे पहले रोली का टीका लगाया जाता है और फिर कुमकुम को उसके ऊपर से लगाते हैं और फिर लास्ट में चावल का टीका लगाया जाता है।

3. अब भाई के हाथ में राखी बांधने से पहले उनके हाथ में एक नारियल जरूर रखें, खाली हाथ में राखी नहीं बांधना चाहिए।

 4. अब आप अपने भाई के हाथ में रक्षा सूत्र या राखी बांधें और फिर उनके हाथ से नारियल वापस लेकर थाली में रखें और फिर थाली में रखा हुआ मिठाई से भाई का मुंह मीठा करायें।

5. अब भाई के लंबी उम्र एवं उनके अच्छे स्वास्थ्य का कामना करते हुए आरती उतारें।

6. अब थाली में रखे हुए पीली सरसों दाहिना हाथ में लेकर भाई के नजर उतारे और फिर सरसो को भाई के पीछे की तरफ फेंक दें।

7. अब थाली में रखा हुआ तांबे के लोटे के अंदर गंगाजल को लेकर अपने भाई को रोगों से मुक्त करने के लिए उनके ऊपर छिड़कें।

8. अब थाली में रखे हुए दीपक को किसी मंदिर में रख दें उसे बुझाएं नहीं।

9. अब अगर आप अपने भाई से छोटी हैं तो उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेवें और अगर आप अपने भाई से बड़ी हैं तो फिर आपके भाई आपके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद ले सकते हैं।

Raksha Bandhan के दिन बहनो से राखी बंधवाने से भाई को हर काम में विजय की प्राप्ति होती है एवं अन्य बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है।

जिन भाइयों को बहने नहीं होती है वो मुंहबोली बहन से राखी बंधवाते हैं इन दिनों सोने चांदी के राखी का प्रचलन बढ़ने लगा है क्योंकि सोना एवं चांदी को शुद्ध धातु माना गया है। सोने चांदी की राखी में भी रेशम का ही धागा होता है।

कई जगहों पर पुरोहित अपने यजमान को राखी बांधते हैं एवं यजमान अपने पुरोहित को और ऐसे में दोनों एक दूसरे की उन्नति की कामना करते हैं।

भारत में कई जगहों पर rakhi muhurat में वृक्षों को भी राखी बांधने का विधान है क्योंकि प्रकृति जीवन का रक्षक होता है।

नोट: वैसे हर राज्य में अपना-अपना परंपरा के अनुसार लोग राखी का त्यौहार मनाते हैं वैसे ही हमने भी अपने यहां पर मनाया जाने वाला रक्षाबंधन की विधि को इस पोस्ट में बताया।

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कलाई पर राखी बांधने का वैज्ञानिक कारण

अगर आप ये सोच रहे हैं कि कलाई पर राखी बांधने का फायदा क्या हो सकता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि भाई बहनों सहित पूरे परिवार में प्यार एवं स्नेह बढ़ता है।

और इसके साथ ही कलाई पर राखी बांधने का आध्यात्मिक, आयुर्वेदिक एवं मनोवैज्ञानिक कारण भी होता है।

अगर हम कलाई पर राखी बांधने का आध्यात्मिक कारण के बारे में बात करें तो माना जाता है कि इससे ब्रह्मा विष्णु एवं महेश की कृपा हमारे ऊपर बनी रहती है।

अब अगर हम कलाई पर राखी बांधने का आयुर्वेदिक कारण के बारे में बात करें तो इससे वात् पित्त एवं कफ संतुलित रहता है।

वही कलाई पर राखी बांधने का मनोवैज्ञानिक कारण भी होता है क्योंकि राखी रक्षा के बंधन को दर्शाती है। और इस तरह से व्यक्ति अपने आप में शक्ति के संचार को महसूस करता है।

कलाई पर राखी बंधवाने से हमारे अंदर आत्मविश्वास की बढ़ोतरी होती है और हमारा सकारात्मक सोच बढ़ता है।

रक्षाबंधन के दिन भाई क्या संकल्प लेता है

रक्षाबंधन के मौके पर भाई अपने बहनों से राखी बंधवाते हैं एवं उनकी रक्षा एवं सुरक्षा करने के लिए संकल्प लेते हैं।

रक्षाबंधन का त्यौहार भाई एवं बहनों का प्रेम एवं स्नेह को और भी गहरा कर देता है और हर भाई का ये कर्तव्य होता है कि वो अपने बहनों का सदा ख्याल रखें एवं उनको खुश रखे।

रक्षाबंधन की कथा

भविष्य पुराण के अनुसार देवासुर संग्राम में इंद्र की पत्नी देवराज इंद्र को असुरों पर विजय पाने के लिए रक्षा सूत्र बांधी थी एवं इसी रक्षा सूत्र की शक्ति से देवराज इंद्र युद्ध में विजयी हुए थे।

महाभारत की एक कथा में भगवान श्री कृष्ण अपने सुदर्शन चक्र से जब शिशुपाल का वध किए थे तो उनकी उंगली में थोड़ा सा खरोच आ गया था।

उनके उंगली में खरोच देखकर द्रौपदी अपने आंचल का एक टुकड़ा फार के उनके उंगली में लपेट दिया था और श्री कृष्ण ने द्रौपदी को यह वचन दिए थे कि समय आने पर उनके आंचल का एक एक धागे का कर्ज़ उतारेंगे।

वो दिन rakhi muhurat सावन का पूर्णिमा था। समय बीता एवं द्रोपदी के चीरहरण के समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी के रक्षा करके अपना वचन निभाया।

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तो यहाँ पे हमने सिखा की राखी का त्यौहार कैसे मनाया जाता है हमें उम्मीद है ये जानकारी आपको पसंद आया होगा अगर अभी भी आपका कोई सवाल या सुझाव है तो निचे कमेंट जरूर करें।

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